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PM मोदी करेंगे भूमि पूजन, जानें-कब और कैसे हुआ था राम मंदिर का शिलान्यास / dainikmail24.com

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो-PTI)



अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अगस्त को करेंगेय. भूमि पूजन के कार्यक्रम में साधु-संतों समेत कुल 200 मेहमान शामिल होंगे. हालांकि, राम मंदिर का शिलान्यास अयोध्या में तीस साल पहले राजीव गांधी सरकार की अनुमति से 9 नवंबर 1989 को किया गया. शिलान्यास में पहली ईंट दलित समुदाय से आने वाले कामेश्वर चौपाल ने रखी थी.

  • PM मोदी 5 अगस्त को राम मंदिर का करेंगे भूमि पूजन
  • राजीव गांधी सरकार में मंदिर का शिलान्यास हो चुका है
  • दलित समुदाय के कमेश्वर चौपाल ने रखी थी पहली ईंट

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन की तारीख पांच अगस्त तय है. राम मंदिर का भूमि पूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे, जिसके लिए अयोध्या को सजाया और संवारा जा रहा है.भूमि पूजन के कार्यक्रम में साधु-संतों समेत कुल 200 मेहमान शामिल होंगे. हालांकि, राम मंदिर का शिलान्यास अयोध्या में तीस साल पहले राजीव गांधी सरकार की अनुमति से 9 नवंबर 1989 को किया गया. शिलान्यास में पहली ईंट दलित समुदाय से आने वाले कामेश्वर चौपाल ने रखी थी.

बता दें कि राम मंदिर शिलान्यास से पहले पूरे देश में विश्व हिंदू परिषद ने इसके लिए अभियान चला रखा था. अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए हिंदू एकजुट होने लगे थे. शिलान्यास के लिए पूरे देश में यात्राएं आयोजित की गईं. राम मंदिर शिलान्यास के लिए ही आठ अप्रैल 1984 को दिल्ली के विज्ञान भवन में एक विशाल धर्म संसद का भी आयोजन किया गया था.

सन 1986 में राम मंदिर का ताला खुला, जिससे मानो बरसों पुराने 'मंदिर-मस्जिद विवाद' को हवा मिल गई. वीएचपी के नेता और रिटायर्ड जज देवकी नंदन अग्रवाल ने 01 जुलाई, 1989 को फैजाबाद की एक अदालत में राम के मित्र के रूप में दावा दायर किया. इस दावा में कहा गया था कि राम और जन्म स्थान दोनों पूज्य हैं. वही इस संपत्ति के मालिक हैं.

राम मंदिर निर्माण को लेकर पूरे देश में जो लहर थी, उसने तत्कालीन राजीव गांधी सरकार पर राजनीतिक दबाव बना दिया था. देश में इसी साल आम चुनाव होने थे. शाहबानो केस को लेकर कांग्रेस पर तुष्टीकरण का आरोप लग रहा था और दूसरी ओर बीजेपी राममंदिर आंदोलन को धार देने में जुटी हुई थी. ऐसे में राजीव गांधी नहीं चाहते थे कि उनकी छवि हिंदू विरोधी नेता के रूप में उभरे. माना जाता है कि हिंदू समुदाय को लुभाने के लिए राजीव गांधी ने 1989 में हिंदू संगठनों को विवादित स्थल के पास राम मंदिर के शिलान्यास की इजाजत दे दी थी.

राजीव गांधी द्वारा शिलान्यास की मंजूरी दिए जाने के बाद वीएचपी नेताओं ने मंदिर निर्माण के लिए अपना आंदोलन और तेज कर दिया. एक तरफ अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन चरम पर था, उधर विहिप के आह्वान पर देश भर से लाखों श्रद्धालु गांव-गांव से ईंट लेकर अयोध्या पहुंचने लगे थे. इस तरह से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा देश का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया. यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने वीएचपी के नेताओं के साथ एक मीटिंग की, जिसमें तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री बूटा सिंह भी शामिल थे. हालांकि, नारायण दत्त तिवारी शिलान्यास के फैसले से सहमत नहीं थे. इसलिए राजीव गांधी ने 08 नवंबर की सुबह बूटा सिंह को लखनऊ भेजा था.

बहरहाल, तमाम रस्साकशी के बीच शिलान्यास के लिए 09 नवंबर 1989 को बाकायदा मुर्हूत तय हुआ. इसके बाद विधि-विधान से भूमि का पूजन और शिलान्यास किया गया. भूमि पूजन स्वामी वामदेव ने किया. वास्तु पूजा पंडित महादेव भट्ट और पंडित अयोध्या प्रसाद ने करवाई. खुदाई की शुरुआत गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ ने फावड़ा चलाकर की. इसके बाद शिलान्यास की पहली शिला बिहार के दलित युवक कामेश्वर चौपाल के हाथों रखी गई.

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