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राहत इंदौरी की याद मे हुआ सम्मेलन, अंजनी अमोघ ने किया संचालन Dainik Mail 24



 *मै जब मर जाऊँ,मेरी अलग पहचान लिख देना,लहू से  मेरी पेशानी पे हिंदुस्तान लिख  देना*


 दुनिया  भर  में  अपनी  शानदार शायरी से लाखों लोगों को अपना  मुरीद बनाने वाले शायर डॉ राहत इंदौरी जी कि स्मृति  में आचार्य अनीस देहाती  की  अध्यक्षता व ओजकवि अंजनी अमोघ के  संचालन में विडिओ कॉन्फ्रेंसिंग के  माध्यम से श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया । समारोह  में डॉ राहत इंदौरी की शायरी के निधन को उर्दू शायरी का अपूरणीय क्षति बताया गया। बताया गया की डॉ राहत इंदौरी साहब  शायरी के वो कलाकार थे जो मंचों पर अपने हर एक शेर  झूम कर पढ़ते थे। जिसमें कभी मोहब्बत की बात  तो कभी व्यवस्था को आइना दिखाते थे। अंजनी अमोघ ने डॉ राहत इंदौरी जी का प्रसिद्ध शेर - "तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो,  मल्लाहों का चक्कर छोडो, तैर  के दरिया पार करो" पढ़कर जीवन के  झंझावातों से लड़कर कभी न हारने के  ज़ज़्बे को नमन किया, और उनके शायरी के विभिन्न पहलू पर प्रकाश डाला। श्रृंगार के युवा शायर सौरभ ओझा ने डॉ राहत  इंदौरी की ग़ज़ल - "रोज तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है, चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है " सुनाकर श्रद्धांजलि अर्पित  किया । कार्यक्रम में डॉ संगम लाल भँवर जी, डॉ श्याम शंकर शुक्ल श्याम जी, गीतकार सुनील प्रभाकर, अनूप अनूपम, प्रसिद्ध शायर अनूप प्रतापगढ़ी, जयराम पाण्डेय राही, प्रमोद प्रियदर्शी, संजय शुक्ल जी समाजसेवी , प्रदीप मिश्र, अजय सोनी उपस्थित रहे।

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