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*अमेठी में दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर सेना का जवान*/dainikmail24.com

*रिपोर्टर- शिवम शुक्ला*




*अमेठी*- सरकार आम आदमियों की सुरक्षा का दावा भले ही करती हो भले ही सरकार धर्म फोन निस्तारण संबंधित तमाम योजनाएं कागज पर चलाई जाती है लेकिन इन योजनाओं से कम अग्नि को किसी भी प्रकार की सूरत नहीं मिल पाती है सबसे बड़ी बात तो यह है कि जब देश की रक्षा और सुरक्षा में लगा सैनिक जो देश की सरहद पर निगाह बानी कर रहा है वह अमेठी में अपनी जमीन के लिए दर-दर की ठोकरें खाता पड़ता है मिट्टी का पुलिस प्रशासन ऐसी सैनिकों को बिल्कुल तो जो नहीं देती है पिछले 3 महीने में लगातार सैनिकों का मामला अमेठी जिले में देखने को मिला है कभी-कभी सैनिक को अपने हक की लड़ाई के लिए वर्दी में एसडीएम कार्यालय के सामने धरने पर बैठना पड़ता है तो कभी जमीन के विवाद के चलते सैनिक के पिता की हत्या हो जाती है इसमें सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस बीच में हुए तीनों सैनिकों का एक ही थाना क्षेत्र संग्रामपुर से जुड़ा हुआ है।
ऐसा ही एक और मामला मीठी जिले के संग्रामपुर थाना क्षेत्र में तीसरी बार देखने को मिला है जहां पर एक फौजी अपनी बैनामे की जमीन पर गांव में मकान नहीं बना पा रहा है जब उस जमीन पर किसी भी प्रकार का कोई स्टे आर्डर नहीं है इसके बावजूद दबंगों के द्वारा फौजी को अपना मकान नहीं बनाने दिया जा रहा है बार-बार पुलिस पहुंचकर निर्माण कार्य को रोक देती है यही नहीं निर्माण कार्य कर रहे मिस्त्री सर लेबर को दबंगों के द्वारा भगा दिया जाता है और मिस्त्री वापस अपने घर जाने लगता है तो रास्ते में दबंग उसको मारते पीटते हैं जिसकी शिकायत लेकर जब फौजी और मिस्त्री अमेठी कोतवाली पहुंचे तो प्रभारी निरीक्षक श्यामसुंदर के द्वारा शिकायत करने हैं सभी लोगों को धारा 151मैं चालान कर दिया गया इस प्रकार फौजी को ना तो संग्रामपुर थाने से व अमेठी कोतवाली से कहीं से भी राहत नहीं मिल पा रही है ।
पूरा मामला संग्रामपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत मड़ौली ग्राम का है जहां पर गाटा संख्या 415 मैं पीड़ित सैनिक ने अपनी मां के नाम पर बैनामा लिया था। राहुल इस समय वर्तमान में भारतीय सेना में जम्मू कश्मीर में तैनात है।इस समय वह छुट्टी लेकर घर आए और मकान बनाना शुरू कर दिया तभी दबंगों द्वारा मना कर दिया गया इसके लिए जब आप पुलिस के पास गए तो पुलिस ने भी दबंगों का ही साथ दिया और काम करने से मना कर दिया जबकि इस गाटा संख्या पर अभी तक कोई भी स्टे आर्डर नहीं है।
इसी गाटा संख्या में दूसरे व्यक्ति का भी निर्माण कार्य चल रहा था जिस ने वर्ष 2009 में जमीन का बैनामा लिया था और तब से लेकर आज तक इन्हीं लोगों का ही उस जमीन पर कब्जा है। लेकिन जब मकान बनाने चले तो उसी गाटा संख्या के एक अन्य हिस्सेदार ने इस पर आपत्ति लगा दिया जबकि उसी गाटा संख्या में जिस व्यक्ति ने आपत्ति लगाई है उसने अपने बैनामे में स्वयं इन लोगों की जमीन दिखाई है।जिसके बाद से लगातार सैनिक व उसका परिवार दर-दर की ठोकरे खा रहा लेकिन पुलिस उन्हीं दबंगों की बात मान रही है और उल्टे इन्हीं लोगों पर ही कार्यवाही कर रही है।।

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