Breaking News

जौनपुर एक अनोखी पहल देखने को मिली / dainikmail24.com

 

रिपोर्टर अमित कुमार तिवारी

मोबाइल नंबर 8429752143


संकोच है इस बात का कि स्वयं को विश्वविद्यालय का छात्र कैसे कह दूं। मै जिला - जौनपुर से हूं।  ई०सी०सी० से बीएससी करने के बाद मैंने विश्वविद्यालय से गणित से एम०एस०सी० करने के लिए 2014 में दाखिला ले लिया। एस० डी० जैन छात्रावास में रहता था। जब छात्रावास से विश्वविद्यालय जाता था तब रास्ते में कुछ घटनाओं को देखकर बहुत दुख होता था। कटरा चौराहा पर कुछ बच्चों का रिक्शे के पीछे कोचिंग पोस्टर चिपकाना। बच्चों का डलिया में सर्प लेकर भीख मांगना। आजाद पार्क के सामने के रोड पर बच्चों का पढ़ाई से वंचित रहना और आजाद पार्क में घूम - घूम कर पैसा मांगना। इन सब घटनाओं ने मुझे अन्दर से झकझोर दिया। मैंने अपने दोस्तों के साथ अपनी एम०एस०सी० के क्लास में ऐसे बच्चों को पढ़ाने के लिए आगे आने को कहा। मेरे साथ 16 लड़के और लड़कियां इस कार्य के लिए तैयार हो गए और आजाद पार्क में रविवार को हमारी क्लास " एक पहल शिक्षा की और " नाम से लगने लगी। यह नाम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ पी० एन ० पांडेय सर ( HoD maths department) ने दिया । मै इन बच्चों की मुस्कुराहट में खो गया और और इन्हे रोजाना पढ़ाने लगा। मेरे मार्क्स लगातार कम हो रहे थे और मै रात में भी ऐसे बच्चों के माता पिता को समझाने और स्कूल में उनका दाखिला करवाने की बात करता था। जब भी पढ़ने बैठता तो मुझे वहीं बच्चे याद आते और मै बेचैन हो जाता। मेरी हालत इस तरह हो गया था मुझे अब दोनों में से एक काम चुनना था या तो मै अपनी पढ़ाई जारी रखता या भी सब छोड़कर बच्चों के बीच चला जाता। दोनों कार्य एक साथ नहीं हो पा रहा था। मै रात भर सोचता रहा पूरी रात नहीं सो पाया। रात में उठकर बच्चों के पास सड़क पर जाकर बैठ गया और वहीं तय किया कि अगले दिन मै अपनी पढ़ाई छोड़ दूंगा। एम०एस०सी० 3rd सेमेस्टर में अपनी पढ़ाई छोड़ दिया। मैंने एक संस्था बनाया " एक पहल शिक्षा समिति"। विश्वविद्यालय के सभी प्रोफेसर्स ने इस कार्य में सहयोग किया। विश्वविद्यालय के सभी छात्रावास के जूनियर्स और सीनियर्स ने भी इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक सहयोग किया। आज मै 200 बच्चों को शिक्षित कर रहा हूं। झुग्गी -झोपड़ी से पहली बार 3 लड़कियों ने विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। आज ये बच्चियां अलग अलग केंद्र कि इंचार्ज भी है। बस्ती की महिलाएं सिलाई  सीखकर अब आत्मनिर्भर बन रही है । बस्ती में सिलाई सेंटर भी चल रहा है। बच्चों को पढ़ने के लिए 3 कंप्यूटर, 1 लैपटॉप और प्रोजेक्टर भी है। मै एक प्राइवेट विद्यालय में मैथ्स का टीचर हूं। विद्यालय से 18,000 रुपए मिल जाता है। उसमे से 10000 रुपए हर महीने बच्चों के शिक्षा पर खर्च कर देता हूं। अब विद्यालय से  निकाल दिया गया हूं और 4 महीने की सैलरी भी रोक लिया गया है। अब मै विवेक ऑनलाइन मैथ्स क्लासेज के माध्यम से अपने जीवन के खर्च को उठाने का प्रयास कर रहा हूं। मै जानता था पढ़ाई छोड़ने के बाद यह सब चुनौतियां आएगी। लेकिन मै खुश हूं अपने फैसले से, मै खुश हूं अपने बच्चों के साथ। जीवन में मानसिक संतुष्टि भी है, शारीरिक संतुष्टि भी है और आध्यात्मिक संतुष्टि भी है।  सभी प्रकार के खुशियों का श्रेय जाता है भगवत गीता की पवित्र पुस्तक को । चौबीस बार इस पुस्तक को पढ़ने के बाद अब सफलता और असफलता का परिभाषा मेरे लिए नहीं रह गया है। बस यही कहना है -

 तुलसी यह तन खेत है, मन कर्म वचन किसान।

 पाप पुण्य दो बीज है, क्या बोना है तू जान।।

आप सभी सादर प्रणाम।

विवेक कुमार दुबे 

9455445546

8005316317( what's app number also)

No comments