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*क्षेत्र का बहाना लेकर चकबंदी का पेशकार रफू-चक्कर* Dainik Mail 24

 *रिपोर्टर - सत्यम पाल* 


*ब्रेकिंग अमेठी*

*चकबंदी अधिकारी मौजूद कर्मचारी नदारद*



अमेठी मे चकबंदी प्रक्रिया भगवान भरोसे चल रही है। बीस वर्षो से चकबंदी के गांव आज भी अंतिम पढाव पर नही पहुच पाये। जब कि तीन विधायक और दो सांसद अपना कार्यकाल पूरा करने के कगार पर है। बसपा सरकार जाने के बाद सपा की सरकार आयी। और सपा की सरकार जाने के बाद भाजपा की सरकार दौड़ रही है भय मुक्त और भ्रष्टाचार मुक्त सरकार का दावा मुख्यामंत्री योगी आदित्यनाथ कर रहे है। लेकिन भ्रष्टाचार भी है और प्रभावशाली कर्मचारी अधिकारी को नही सुन रहे है। चकबंदी विभाग अमेठी तहसील मे चल रहा है जहा पर सहायक चकबंदी पारसनाथ की तैनाती है। इनके पेशकार ज्ञान प्रकाश पाण्ंडेय है। इनकी हाल ऐ है किसानों का काम करने को राजी नही और न ही फोन उठाने को तैयार है विभागीय कर्मचारी भी पेशकार के कारनामें से परेशान हैं चकबंदी गांव के वरासत, वसियत, तथा खारिज दाखिल के मामलें में समय से काम करने को कर्मचारी तैयार नही है। और रिश्वत ऐसी चीज हैजो समय पर काम करने के बाद रिश्वत के सहारे काम को अंजाम दिया जाता है यही श्रृखला चकबंदी विभाग में चल रही है शहर का सटा हुआ गांव सरवनपुर बीस वर्षो से चकबंदी प्रक्रिया में लंबित है अभी धारा 52 का प्रकाशन चकबंदी अधिकारी नही करा सकें। शहर के किनारे गांव होने के नाते नजराने और रिश्वत का खेल रईस लोग चला रहे है। जिनके कटपुटली चकबंदी विभाग के अधिकारी नाचने को मजबूर है। आखिर क्या ऐसी बात है चकबंदी विभाग का मुआयना जिलाधिकारी और कमीश्नर क्यो नही करते। सुविधा देने के बजाय किसानों को चकबंदी विभाग पूरा उलझा कर रखा है। चकबंदी विभाग के पेशकार से अधिकारी भी बैचान नजर आते है। किसानों ने महामहिम राज्यपाल से अमेठी के चकबंदी प्रक्रिया की जांच करवाने की पुरर्जोर मांग उठाई है। चकबंदी विभाग में सुबह से शाम तक अधिकारी कर्मचारी प्रातः दस बजे से पांच बजे तक ठहराव के लिए तैयार नही। उपजिलाधिकारी अमेठी भी इन पर आज तक नजर नही डाली। आखिर क्यो किसानों ने मांग उठाई इनकी पड़ताल स्थानीय प्रशासन जरुर करे भारतीय किसान यूनियन ने समस्या को लेकर प्रदर्शन की चेतावनी दी है हाल न सुधरा तो धरना भी अनवरत जारी रहेगा और किसान को हक दिला कर रहेगे।







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