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अपने भी गलत को गलत कहें - डा.अरुण रत्नाकर Dainik Mail 24

 रिपोर्टर- अरबिंद दुबे



प्रतापगढ़। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। किसी एक व्यक्ति के अच्छे कार्यों से समाज अच्छा नहीं बन सकता है।वह केवल नजीर बनकर लोगों को अच्छे कार्यों के लिए प्रेरित कर सकता है।समाज को सुन्दर,सुव्यवस्थित और सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति का सहयोग अपेक्षित है।प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि अपने अच्छे कार्यों एवं विचारों से समाज को व्यवस्थित बनाये रखे।प्रकृति ने सबको अलग-अलग बुद्धि और विवेक दिया है।लोगों को अपने विवेक से काम लेना चाहिए।सत्य और असत्य, गलत और सही कहने का हौसला लोगों में होना चाहिए।प्रायः यह देखा जाता है कि अगर व्यक्ति अपने समुदाय का,या फिर मित्र, रिश्तेदार या अपना है तो उसके गलत कार्यों पर पर्दा डालकर उसको आगे बढ़ाने का कार्य करते हैं ।मौन समर्थन गलत लोगों में आत्म विश्वास पैदा करता है।यही बढ़ावा एक दिन समाज के लिए घातक बन जाता है और इसका परिणाम पूरा समाज भुगतता है।जिस तरह से एक भेंड़ के पीछे सैकड़ों भेंड़ चल देते हैं उस तरह से लोगों को कदापि नहीं चलना चाहिए क्योंकि मानव इस जगत का सबसे बुद्धिमान प्राणी है।यही बुद्धि मानव को अन्य प्रणियों से भिन्न बनाता है।अपने भी गलत को गलत कहें तभी एक सुन्दर समाज का निर्माण सम्भव है।







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