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अवधी भाषा के प्रचार-प्रसार में दे रहे योगदान - डॉ.अखिलेश पाण्डेय Dainik Mail 24

 



प्रतापगढ़ ।डी. ए. वी. कॉलेज हरियाणा के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अखिलेश पाण्डेय जो मूलत: प्रतापगढ़ के लालगंज अझारा से हैं। आप अवधी-पाठशाला के तहत ऑनलाइन अवधी भाषा के प्रचार प्रसार करने में लगे हैं। इनका कहना है कि आंचालिक भाषा के प्रयोग से भाषा की बुनियादी स्थिति अत्यधिक सुदृढ़ होती है। सभी को अपनी आञ्चलिक भाषा का प्रयोग करना चाहिए जिससे उसका अस्तित्व सुरक्षित रहे ।अवधी-भाषा का अपना साहित्य है जिसको पढ़ने कि आवश्यकता है एवं संरक्षित करने कि आवश्यकता है। इसके प्रचार-प्रसार हेतु विगत 13 सितंबर को हिन्दी-पखवाड़ा के सन्दर्भ में ऑनलाइन अवधी व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अवधी- पाठशाला नामक संस्था द्वारा ऑनलाइन माध्यम से जूम एप पर हुआ। इस कार्यक्रम का संयोजन डॉ. अखिलेश पाण्डेय, सम्पादक अवधी-पाठशाला ने किया एवं सारस्वत अतिथि के रूप में डॉ. वशिष्ठ नारायण त्रिपाठी, सेवानिवृत्त अधिकारी, आयकर विभाग, लखनऊ रहे उन्होनें कहा कि अवधी भाषा में बात करने का अलग आनन्द है। डॉ. अञ्जनी कुमार कौशल, पूर्वाध्यक्ष मानससम्मेलन, लालगंज, प्रतापगढ़ ने भाषा के विकास पर जोर देते हुये कहा कि भाषा के प्रयोग से साहित्य का अस्तित्व सुरक्षित रहेगा। वहीं अध्यक्षता करते हुये डा. निलिम्प त्रिपाठी, प्रोफेसर, महर्षि महेशयोगी वैदिकविश्वविद्यालय,भोपाल ने कहा कि साहित्य और अवधी का मिश्रण सुखानुभूति प्रदान करता है ।विशिष्टवक्ता के रूप में डॉ. मनीष चाण्डक, असिस्टेंट प्रोफेसर, केन्द्रीयसंस्कृतविश्वविद्यालय,जयपुर, राजस्थान ने हिन्दी की प्रयोजन मूलकता पर व्याख्यान प्रस्तुत किया ।विशिष्ट अतिथि के रूप में डी. ए. वी. कालेज के प्राचार्य जी ने कहा कि अवधी भाषा के प्रयोग में अधिक से अधिक युवाओं की सहभागिता होनी चाहिए। वहीं विनय कुमार तिवारी, प्रतापगढ़ ने कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. अतुल द्विवेदी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की एवं आचार्य सिद्धेश पाण्डेय, वाराणसी ने वैदिक मंत्रोच्चार किया। इस कार्यक्रम में सचिव कुलदीप मिश्र, डॉ. शैलेंद्र पाण्डेय, कटनी, त्रिभू तिवारी, शुभम श्रीवास्तव, प्रतापगढ़, शुभम तिवारी आदि मौजूद रहे।




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