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चिरविजय का स्वप्न हूँ मन में संजोए... Dainik Mail 24

 रिपोर्टर अरबिंद दुबे



प्रतापगढ़। बुधवार को हिन्दी पखवारा के तहत आयोजित कार्यक्रम स्व. गया प्रसाद अग्रहरि उर्फ मैनेजर साहब की स्मृति में कवि गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन पुराना निरंकारी भवन भयहरन नाथ धाम रोड कटरा गुलाब सिंह में उनके प्रपौत्र तथा सुप्रसिद्ध गीतकार डा.अशोक अग्रहरि प्रतापगढ़ी के सरपरस्ती में सम्पन्न हुआ, कार्यक्रम का  शुभारम्भ वरिष्ठ साहित्यकार डा.दयाराम रत्न तथा अवधी कवि अनीश देहाती व वरिष्ठ पत्रकार अमित कुमार मिश्र ,राजेश कुमार, आनंद मोहन ओझा तथा डाॅ. अशोक अग्रहरि के मां सरस्वती के प्रतिमा पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलन से हुआ, कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले सभी कवियों, कवियत्रियों का माल्यार्पण, प्रशस्ति पत्र तथा ट्राफी प्रदान कर सारस्वत सम्मान किया गया, साथ ही विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे अम्मा साहब ट्रस्ट के अध्यक्ष आनंद मोहन ओझा, सेवा निवृत्त पुलिस इन्सपेक्टर क्राइम ब्रांच कौशाम्बी राजेश कुमार व दैनिक विधान केसरी के जिला ब्यूरो अमित कुमार मिश्र को भी अपने कार्य क्षेत्र में विशेष उपलब्धि के लिए माल्यार्पण, प्रशस्ति पत्र तथा ट्राफी प्रदान करने के साथ कवि समूह की तरफ से विशेष रूप से निर्भीक, निर्पेक्ष तथा न्याय प्रिय पत्रकारिता हेतु जनपद के सम्मानित समाचार पत्र दैनिक विधान केसरी के जिला ब्यूरो अमित कुमार मिश्र का  माल्यार्पण, प्रतिमा व प्रशस्ति पत्र भेंट करने के साथ साफा लगा कर विशेष सम्मान और अभिनन्दन किया गया,तत्पश्चात सूत्रधार तथा संचालन कर रहे डा. अशोक अग्रहरि की वाणी बन्दना से कवि गोष्ठी की शुरुआत हुई, रफ्ता रफ्ता एक कवियों ने अपनी अपनी विधा में कविता पाठ करते हुए मंच को शीर्ष पर पहुंचाने का काम बदस्तूर जारी रखा, कवि, गीतेश यादव, हरि बहादुर हर्ष, कस्तूरी मुस्कान, नवल किशोर कक्के, हास्य कवि अर्जुन प्रसाद ,संतोष मिश्रा के काव्य पाठ के साथ, लोक भाषा के नामचीन कवि अनीस देहाती जी ने गंवई अन्दाज़ में गाँव की बात कुछ इस तरह रखी 'डिगरी तमाम लइके अहैं पान लगावत,हमरे सपूत एहि बरे फेलै भले अहैं ' ।सभाध्यक्ष तथा जाने माने साहित्यकार डा.दयाराम रत्न ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में आयोजक, संयोजक तथा संचालक गीतकार डा. अशोक अग्रहरि प्रतापगढ़ी को यशस्वी कवि की उपमा देते हुये कहा कि कर्मवीर ही स्वर्णिम इतिहास बनाते हैं, उन्होंने संदेश परक काव्यपाठ भी किया, चिरविजय का स्वप्न हूँ मन में संजोये ,शूल में मैं फूल बनकर खिल रहा हूँ । प्रयाग राज से पधारी कवियत्री नन्दिता एंकाकी ने सूफी गजल पढ़ा, तेरे ही खयालों में रहना मैं चाहूं, पढ़कर अपना असर डाला ।झूंसी से पधारे कवि अभिषेक रवि ने जिन्दादिली का सबूत कुछ इस तरह का एक शेर पढ़कर दिया 'जिद पे आ जाऊं तो रुख आंधियो का मोड़ दूं , और पकड़ लू बादलों को सर के बल सर फोड़ दूं ।समसामयिक कवि डा. अरुण रत्नाकर ने सच और झूठ का अन्तर कुछ यूँ बयां किया 'मूशीबत में बहुत कम ही लोग साथ देते हैं ,समझते हैं जो रिश्ते को वही हाथ देते हैं । विशिष्ट अतिथि विधान केसरी ब्यूरो चीफ अमित मिश्र ने अपने उद्बोधन में कहा कि कवियों ने हमेशा समाज को भटकने से बचाने का कार्य किया है।कवियों ने समाज को एक नई दिशा दी है। और अन्त में संयोजक, आयोजक, संचालक गीतकार डा.अशोक अग्रहरि ने भी अपनी विधा में आम अवाम की दुश्वारी और दिक्कत को तरन्नुम और व्यंगात्मक लहजे में पढ़कर लोगों को खूब गुदगुदाते हुये हॅसाया ही नहीं हकीकत और झूठ का राजपाश भी बड़ी बेबाकी से किया, जिस पर लगातार तालियां बजी, और लोगों ने काफी पसन्द किया, दोबारा एक गीत और पढ़ने की फरमाइश कर मुहर लगाया कि यही आज के दौर की सच्चाई है, जिसका नहीं बना अधार, मरे रे बाबा वो बाबा ,छीना सब का रोजगार मरे रे बाबा वो बाबा ,नेता बन गये अपराधी, कपड़े पहने जो खादी ,हो सके तो देश बचा लो, ले डूबेंगे ये फसादी ,फैला ये भ्रष्टाचार ,  मरे रे बाबा वो बाबा ।‌ समापन अवसर पर मण्डल मन्त्री दीपक जायसवाल तथा निरंकारी मिशनरी सन्त लाल जी ने आये हुये सभी अतिथियों व क्षेत्रवासियों को सहभागिता हेतु धन्यवाद ज्ञापित कर सादर आभार प्रकट किया।




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