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हाईकोर्ट : पद पर रहते सिविल सेवा में आवेदन का क्या है प्रावधान Dainik Mail 24

 

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से पूछा है कि भूतपूर्व सैनिक सेवा में रहते हुए सिविल पदों के लिए आवेदन कर सकता है या नहीं।

कोर्ट ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार निर्देशों की जानकारी मांगी हैं। कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय और निदेशक पुनर्वास के साथ राज्य सरकार से भी इस संदर्भ में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने सुधीर सिंह व दो अन्य की याचिका पर अधिवक्ता सीमांत सिंह को सुनकर दिया है।अधिवक्ता सीमांत सिंह के अनुसार याचियों ने वर्ष 2016 में एक्स सर्विसमैन कोटे के तहत ग्राम विकास अधिकारी के पद के लिए आवेदन किया था। परीक्षा में सफल होने के बाद उन्हें नियुक्ति मिल गई और फरवरी 2019 में उन्होंने ज्वाइन कर लिया। उसके बाद कमिश्नर ने एक आदेश जारी कर याचियों को सुनवाई का अवसर देते हुए पद से बर्खास्त करने को कहा। उसके बाद मई 2019 में यह कहते हुए याचियों को बर्खास्त कर दिया गया कि ग्राम विकास अधिकारी के पद के लिए आवेदन की अंतिम तिथि पांच अक्तूबर 2016 को वे सेना में कार्यरत थे। उन्होंने सेवानिवृत्त हुए बगैर आवेदन किया है इसलिए उनकी नियुक्ति अवैध है। अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि सेना के ऐसे कई आदेश हैं जिनके अनुसार सैन्यकर्मी सेवानिवृत्त होने से एक वर्ष पूर्व सिविल पदों के लिए आवेदन कर सकता है। दूसरी तरफ राज्य सरकार का कहना था कि सेना के नियम और आदेश राज्य सरकार पर लागू नहीं होंगे। याचियों की ओर से यह भी कहा गया कि राज्य सरकार के कुछ विभाग सेवानिवृत्ति से एक वर्ष पूर्व का आवेदन स्वीकार करते हैं और कुछ विभाग इसे नहीं मानते हैं। इस पर कोर्ट ने केंद्र और राज्य को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश देते हुए कहा कि राज्य सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि एक्स सर्विसमैन को यह लाभ इसलिए भी दिया जाता है कि वह समाज की मुख्य धारा में शामिल हो सके। भूतपूर्व सैनिक सेना के कड़े अनुशासन में प्रशिक्षित होते हैं। राज्य सरकार उनकी सेवाओं का लाभ ले सकती है। साथ ही वे राष्ट्रीय गौरव भी हैं।








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