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तथ्य छिपाकर याचिका दाखिल करना पड़ा महंगा Dainik Mail 24

 

प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पीसीएस-2018 मुख्य परीक्षा में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की स्केलिंग पद्धति के खिलाफ दाखिल याचिका को हर्जाने के साथ खारिज कर दिया है। कोर्ट ने तथ्य छिपाकर याचिका दाखिल करने के लिए याचियों आलोक कुमार सिंह, शशांक शेखर सिंह, उपेंद्र कुमार सिंह, अनुज द्विवेदी व निर्मल कुमार जायसवाल के ऊपर 10-10 हजार रुपये जुर्माना लगाया है।सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि याचियों ने झूठ बोला कि इस मामले में यह उनकी पहली याचिका है, जबकि इसी मुद्दे को लेकर वे पहले भी याचिका दाखिल कर चुके हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने आलोक कुमार सिंह व अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका में यूपीपीएससी पीसीएस-2018 मुख्य परीक्षा में स्केलिंग पद्धति को सुप्रीम कोर्ट के संजय सिंह केस के विधि सिद्धांतों के विपरीत बताया था। मांग की गई थी कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से पीसीएस-2018 मुख्य परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के नाम, प्राप्तांक, उनकी कैटेगरी आदि का सम्पूर्ण ब्योरा मांगा जाए। साथ ही याची व अन्य सफल अभ्यर्थियों की बिना स्केलिंग और स्केलिंग के बाद के अंकपत्र भी तलब किए जाएं। इसके अलावा आयोग को यह निर्देश दिया जाए कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत दाखिल प्रार्थना पत्रों पर याचियों को सूचना मुहैया कराएं। याचिका का विरोध करते हुए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अधिवक्ता ने कहा कि पीसीएस-2018 मुख्य परीक्षा का परिणाम 11 सितंबर, 2020 को आ चुका है। इसी मुद्दे को लेकर के अन्य अभ्यर्थी भी याचिका दाखिल कर चुके हैं। पूर्व में याचिका दाखिल करने वालों में इस याचिका के चार अभ्यर्थी भी शामिल थे। परीक्षा में किसी प्रकार की गड़बड़ी का आरोप नहीं है। सिर्फ स्केलिंग पद्धति को लेकर याचिका दाखिल की गई, जिसका सूचना के अधिकार से कोई लेना-देना नहीं है। याची चाहें तो सूचना के अधिकार के तहत प्रक्रिया के अनुसार अपील दाखिल कर सकते हैं। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि संजय सिंह के केस में पारित सुप्रीम कोर्ट का निर्णय इस मामले पर लागू नहीं होता है।








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