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शिवानी अग्रहरि के आरोपियों को फांसी,परिजनों को सुरक्षा और आर्थिक मदद जरूरी - कवि डा. अशोक अग्रहरि Dainik Mail 24

 रिपोर्टर - अरबिंद दुबे



प्रतापगढ़ । पुवासी बाघराय में आरोपियों द्वारा लगातार छेड़छाड़ से तंग युवती शिवानी अग्रहरि सुपुत्री शीतला अग्रहरि का कुएं में कूद कर जान देना हर बेटियों वाले बाप के लिए दहशत का सवब और सभ्य समाज के मुंह पर करारा तमाचा ही नहीं गाँव गिराव में अभी भी सामन्तवाद और अधिनायकवाद का जीता जागता उदाहरण है l जिस तरह प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया से छनकर खबर आ रही है उसके मुताबिक तीनों आरोपियों में से एक के ऊपर एससी एसटी ऐक्ट का मुकदमा पहले से ही कायम है । बाकी उन दोनों की आम शोहरत इलाके में अच्छी नहीं है,फिर सरकार के अपराधियों,भूमाफियों , शोहदों को चिन्हित कर जेल भेजने और कार्रवाई करने के अभियान को आखिर क्या हुआ है जबकि उस थाने में इनका नाम भी रजिस्टर आठ में निश्चित दर्ज होगा । लोग तो यहाँ तक बताते हैं कि इनकी दबंगई,गुण्डागर्दी से गाँव के लोग इस कदर खौफजदा हैं कि कोई जुबान खोलने को राजी नहीं है, हालांकि अपराधी - अपराधी होता है किसी भी समाज का हो l मगर जिस तरह से छ: महीने से उस बिटिया के पीछे ये अराजक तत्व पड़े थे और आखिर में अपनी अस्मत बचाने के लिए उसने कुएँ में कूदकर आत्महत्या कर ली वह मर्मस्पर्शी और चिन्ताजनक है इसलिए मामले की लीपापोती न कर ईमानदारी से पुलिस कर्मी आरोपियों की गिरफ्तारी कर सीमित समयावधि में साक्ष्य सबूत इकट्ठा कर अपराधियों को सख्त सजा दिला पायेंगे तो अपराधियों में खौफ, बहन बेटियों में सुरक्षा भावना तो जागृत होगी ।पुलिस और सरकार की साख भी बुलन्द होगी,जो निरन्तर रसातल को जा रही है ।








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