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हाईकोर्ट ने बैंक को चूना लगाने वाले की जमानत अर्जी खारिज की Dainik Mail 24

 


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर केनरा बैंक से करोड़ों रुपये का लोन लेकर नुकसान पहुंचाने में आरोपित सैगान इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक राजेश मेहता की जमानत अर्जी खारिज कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने दिया है। राजेश मेहता बैंक को 10.49 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने में आरोपित है। मामले की जांचकर सीबीआइ ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। केनरा बैंक के डिप्टी जनरल मैनेजर ने इस मामले में मेहता सहित छह लोगों के खिलाफ नई दिल्ली में प्राथमिकी दर्ज कराई है। आरोप है कि मई 2015 में याची ने कंपनी के अन्य निदेशकों से साठ-गांठ कर कंपनी ने चार करोड़ रुपये का कर्ज बैंक से लिया। साथ ही प्रापर्टी के फर्जी दस्तावेज दिखाकर 9.5 करोड़ रुपये की फंड लिमिट हासिल की। जिस प्रापर्टी के एवज में लोन लिया गया वह याची मेहता की ओर से वर्ष 2008 में ही बेची जा चुकी थी। सीबीआइ के वकील असिस्टेंट सॉलीसिटर जनरल ज्ञान प्रकाश व संजय यादव ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि याची ने बैंक के साथ फ्राड किया है। उसने प्रापर्टी के फर्जी दस्तावेज बनाए हैं और पहले ही बेची जा चुकी संपत्ति को बंधक रख दिया। याची अधिवक्ता का कहना था कि याची 31 अक्टूबर 2019 से जेल में बंद है। सीबीआइ चार्र्जशीट दाखिल कर चुकी है। ऐसे में साक्ष्य से छेड़छाड़ का प्रश्न नहीं है। उसे जमानत पर रिहा किया जाए। कोर्ट ने जमानत का ठोस आधार न पाते हुए अर्जी खारिज कर दी है।








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