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Pratapgarh कवियों ने कविमंच से बाँधा समा लोग हुए प्रफुल्लित

 बेहया हो गये, बेशरम हो गये, जब से नेता हुये बेधरम हो गए...





प्रतापगढ़ । गुरुवार को अपराह्न दो बजे संवर्धन संस्था के बैनर तले सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन कृषि भवन प्रताप गढ़ में किया गया। संस्था के अध्यक्ष डा.श्याम शॅकर शुक्ल श्याम ने माँ सरस्वती को माल्यार्पण, पूजन कर विधिवत कार्यक्रम की शुरुआत की, सभा की अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार संगम लाल त्रिपाठी भंवर तथा कुशल संचालन प्रमोद प्रियदर्शी ने किया । इसी क्रम में उपस्थित कवियों, कवियत्रियों को माल्यार्पण तथा कलम भेंट कर सम्मानित भी किया गया l गोष्ठी का आगाज़ शिवानी मिश्रा की वाणी बन्दना तथा श्रृंगार की बेहतरीन रचना से होकर निरन्तर एक से बढ़कर एक रचनायें तहत और तरन्नुम में रचनाकारों ने पढ़ी। जनपद के वरिष्ठ और चर्चित गीतकार डा.अशोक अग्रहरि प्रतापगढ़ी की सियासी रचना ने इस दौर के सियासी हालात को कुछ इस लहजे में तरन्नुम में पढ़कर तॅज कसा, जिसे लोगों ने काफी पसंद किया बेहया हो गये बेशरम हो गये,जब से नेता हुये बेधरम हो गये,जब हुये उनसे मौजू सवालात तो, तल्ख तेवर हुये औ गरम हो गये" जनपद के ही वरेण कवि गीतकार संगम लाल त्रिपाठी भॅवर ने निहित स्वार्थ में लिप्त आदमी की फितरत और मिजाज पर उम्दा शेर पढ़ा स्वार्थपरता को धोता चला आदमी, बीज नफरत के बोता चला आदमी संस्था के अध्यक्ष डा. श्याम शॅकर शुक्ल श्याम ने मानवीय मूल्यों के संरक्षण और नेकनीयती की प्रबल पैरोकारी अपनी बेहतरीन रचना से कुछ इस तरह की, हमने माना कि नीम बेर नहीं हो सकती, नेक इरादों की नींव ढेर नहीं हो सकती इसी के साथ ही राजेश प्रताप गढ़ी, भानु प्रताप सिंह भानु, प्रेम कुमार प्रेम, सुरेश व्योम, शेष नरायण राही, विपिन शुक्ला, राकेश प्रतापगढी, नीलम शर्मा,डा. अजय सिंह, डा. श्रद्धा सिंह इत्यादि कवि एवं कवियत्रियों ने काव्य पाठ किया ।








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