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रामलीला मंच से कवियों ने भी एकता व प्रेम बन्धुत्व का दिया संदेश Dainik Mail 24

 "सराफत के मुखौटे में छिपे खूंखार शातिर से...

  


प्रतापगढ़‌। श्री आदर्श रामलीला समिति सेतापुर बिहारगंज में रामलीला के मंच पर कवि सम्मेलन का नूतन प्रयोग भविष्य में बड़े कवि सम्मेलन का मार्ग प्रशस्त कर गया, हलांकि क्षेत्रीय मेला और रामलीला बहुत पहले से होता चला आ रहा है, मगर रामलीला के मॅच पर जनपद के  गिने चुने और स्थापित वरिष्ठ कवि और कवियत्री को ही बुलाया गया,  मगर कार्यक्रम पूर्णतः सफल और सार्थक रहा, आयोजक मण्डल के बुलावे पर पधारे जनपद के वरिष्ठ और चर्चित गीतकार डा. अशोक अग्रहरि प्रतापगढ़ी के संजीदा शेर,  मुक्तक और व्यंग गीत पर श्रोताओं के साथ मौजूद साहित्यकार भी पूरे रिद्म में पंक्तियों को दोहराते देखे गये,  

"  सराफत के मुखौटे में   छिपे खूंखार शातिर से, कहीं जाहिल वो अपने गाँव का रमजान अच्छा है । 

    कहे न करके जो कुछ भी वही इन्सान अच्छा है

  शहर के तंग कमरों से कहीं दालान अच्छा है " ।।

आज के आदमी के दोहरे किरदार तथा तंगदिली को आइना दिखाती ऐसी बेहतरीन पॅक्ति को लोगों ने तालियों के गड़गड़ाहट और वाह वाह से भरपूर समर्थन किया, सॅचालन नवांकुर कवियत्री आकांक्षा वत्स ,नियोजन विकास पाण्डेय, संयोजन दुर्गेश योगी जी, प्रवीण योगी ने किया । कवियत्री मीरा तिवारी तथा नवोदित कवि आदर्श जायसवाल ने भी रचनायें पढ़ी ।








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