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भारतीय जातिगत व्यवस्था भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद है - निकी डबास Dainik Mail 24

 


लक्ष्मणपुर, प्रतापगढ़ । जातियां मात्र लोगों के झुंड विशेष का द्योतक नहीं है बल्कि जातियां अनेकों व्यवसाय विशेष का पीढ़ी गत पारंगत अध्ययन एवं अलिखित ज्ञान का संग्रह रखने वाले लोगों का भूतकाल से भविष्य तक की कड़ी को जोड़ने का माध्यम है l प्रत्येक जाति के अपने अनुवांशिक गुण पारिवारिक संस्कार जीवन शैली तथा पौराणिक धरोहर को संरक्षित रखने का अधिकार है । जो लोग जातिगत व्यवस्था का विरोध करते हैं उन्हें स्वयं किसी मूलाधार से जुड़े होने पर कोई गर्व नहीं होता साथ ही वह दूसरों के मूल गुणों को नष्ट करने का भी प्रयास करते हैं l ऐसे लोगों को ना तो अपने पूर्वजों में आस्था है, ना ही उन्हें अपनी भविष्य की नस्लों की परवाह ।यह वह लोग हैं जिन्हें सिर्फ अपना गुजारा करने के लिए अन्य लोगों पर आश्रित रहना पड़ता है । इनका उसूल, संस्कार, परिवार और समाज से कोई खास रिश्ता नहीं होता । ऐसे लोगों की नस्लों में वैचारिक मतभेद के साथ-साथ अनुवांशिक गुणों के साथ भी छेड़छाड़ के साक्ष्य प्राप्त होते हैं ।








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