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भागवत कथा के अंतिम दिन सजी कृष्ण-सुदामा की झांकी Dainik Mail 24

 

भागवत कथा के अंतिम दिन भी उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़


प्रतापगढ़।भदौरियन के पुरवा ऊछापुर में चल रही भागवत कथा के सातवें दिन राम जानकी के महंथ बाबा घुश्मेश्वर नाथ धाम से आए कथा वाचक भागवताचार्य पं. उमापति मिश्र ने सुदामा चरित्र की कथा सुनाई। प्रवचन में कहा कि सुदामा एक दरिद्र ब्राह्मण थे,जिन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के साथ संदीपन ऋषि के आश्रम में शिक्षा ली थी।दरिद्रता तो जैसे सुदामा की चिरसंगिनी ही थी।एक टूटी झोपड़ी,दो-चार पात्र और लज्जा ढकने के लिये कुछ मैले और चिथड़े वस्त्र,सुदामा की कुल इतनी ही गृहस्थी थी।दरिद्रता के कारण अपार कष्ट पा रहे हैं।पत्नी के आग्रह को स्वीकार कर कृष्ण दर्शन की लालसा मन में संजोये हुए सुदामा कई दिनों की यात्रा करके द्वारका पहुंचे।द्वारपाल के मुख से सुदामा शब्द सुनते ही भगवान श्रीकृष्ण ने जैसे अपनी सुध-बुध खो दी और वह नंगे पांव ही दौड़ पड़े द्वार की ओर।दोनों बाहें फैलाकर उन्होंने सुदामा को हृदय से लगा लिया।भगवान श्रीकृष्ण सुदामा को अपने महल में ले गए।उन्होंने बचपन के प्रिय सखा को अपने पलंग पर बैठाकर उनका चरण धोए।कृष्ण के नेत्रों की वर्षा से ही मित्र के पैर धुल गये lसुदामा खाली हाथ अपने गांव की और लौट पड़े और मन ही मन सोचने लगे कृष्ण ने बिना कुछ दिए ही मुझे वापस आने दे दिया।सुदामा जब गांव पहुंचा तो देखा झोपड़ी के स्थान पे विशाल महल है जिसे देख सुदामा चकित हो गए।पाठ वाचक ने बताया की कृष्ण ने बताए बिना तमाम ऐश्वर्य सुदामा के घर भेज दिया।अब सुदामा साधारण ग़रीब ब्राह्मण नहीं रहे। उनके अनजान में ही भगवान ने उन्हें अतुल ऐश्वर्य का स्वामी बना दिया किंतु सुदामा ऐश्वर्य पाकर भी अनासक्त मन से भगवान के भजन में लगे रहे।कथा के अंत में महाआरती के बाद प्रसादी वितरण किया गया।कथा में भाग लेने वाले रवीन्द्र बहादुर सिंह,दुष्यंत सिंह,दिलीप सिंह, दिग्गज सिंह सहित समस्त श्रद्धालुओं के अच्छे भविष्य की कामना की गईl इस मौके पर आचार्य मयंक शुक्ल,आचार्य पंकज कुमार मिश्र, आचार्य परमेंद्र कुमार शुक्ल,आचार्य अंजनी मिश्र सहित भारी भीड़ पांडाल में उमड़ पड़ी। कथा आयोजक माता शरण सिंह भदौरिया और उनके परिवार ने सभी श्रद्धालुओं का आभार जताया और चौबीस नवम्बर दिन  मंगलवार को आयोजित होने वाले भण्डारे में प्रसादी लेने की सभी भक्तों से अपील की।








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