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प्रधानों के कार्यकाल के 2 दिन शेष, चेहरे की मुश्कान हुई फीकी Dainik mail 24

 

रिपोर्ट-स्वरूप श्रीवास्तव महराजगंज 23-12-2020

 


महराजगंज__जिले में ब्लाक के बहुत से ग्राम प्रधान अपनी कमियां छुपाने के लिए नए नए हथकंडे अपना रहे हैं, लेकिन अधूरे पड़े शौचालय और ग्राम पंचायत में फर्जी भुगतान को लेकर नींद हराम हो गए प्रधानों की अपनी कमियां छुपाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। इसमें जिम्मेदार अधिकारी भी अपनी बचने के चक्कर में इधर-उधर भागने की फिराक में है। प्रधानों का कार्यकाल दो दिन बाद 25 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। इसके बाद ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त हो जाएंगे। सरकार के इस कदम से प्रधानों में बेचैनी छा गई है! शासन के दिशा निर्देशों के अनुसार प्रत्येक 5 वर्ष बाद पंचायतों के चुनाव होते रहते हैं। इन चुनावों में कुछ प्रधानों को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ती है तो कुछ की पुनः ताजपोशी होती है। आरक्षण व्यवस्था के चलते कुछ प्रधान बिना लड़ाई के ही मैदान से बाहर हो जाते हैं। वहीं कुछ को पुनः किस्मत आजमाने का मौका मिलता है। पंचायत चुनाव में आरक्षण व्यवस्था को लेकर अभी भी गांव में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। असमंजस के चलते चुनाव के दावेदारों ने अभी वोटरों से दूरी बनाए हुए है। सीटों का आरक्षण तय होने के बाद गांव में सेवा भाव का सिलसिला एवं चुनावी सरगर्मी तेज हो जाएगी।

अपने द्वारा किए गए विकास कार्यों के आधार पर कुछ प्रधान जहां पुनः अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं। वही कुछ प्रधानों को अपने कार्यकाल में किए गए घोटालों एवं समाज विरोधी कार्यों से अपनी कुर्सी गँवाने की चिंता अभी से ही सता रही है।

चुनावी भवसागर में सभी प्रधानों की नैया अब भगवान भरोसे ही टिकी हुई है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है अपनी जीत को लेकर प्रधानों की मायूसी उनके चेहरे पर साफ झलक रही है।

वाह रे परधानी जितने दिन प्रधान थे, कुछ तथा कथित प्रधान जी लोगों को सिर्फ पैसा, ब्लाक, चापलूस, मुर्गा की पार्टी, दारु की पार्टी, सम्बन्धित अधिकारियों को खुश रखना और आवास शौचालय निर्माण में धन उगाही करना, नयी नयी गाडियाँ खरीदना और जो पिछले चुनाव में साथ थे उन्ही का बुरा सोंचना आदि तमाम आदतें उत्पन्न हो गयी थी जो आज इनके लिए सिरदर्द बन चुकी हैं। ऐसे में ये प्रधान जी कुछ भी आगे की रणनीति नही बना पा रहे हैं!








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