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भागवत कथा में पंचम दिवस भगवान कृष्ण की बाल लीला एवं पूतना उद्धार का वर्णन करते - पं. शेषधर मिश्र अनुरागी महराज Dainik Mail 24

 पंचम ग्रंथ है श्रीमद् भागवत कथा - पं. शेषधर मिश्र अनुरागी जी महराज


प्रतापगढ़ l नींवी खुर्द गारापुर ग्रामीण अंचल में तिवारी परिवार द्वारा चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला गोवर्धन पूजा की अमृत मयी कथा सुनने को हजारों की भीड़ में प्रख्यात कथा वाचक पं. शेषधर मिश्र अनुरागी जी महराज के मुख से सविस्तार गोपियों के यहां माखनचोरी में अपने साथियों के साथ चोरी करने को गुट बनाकर चोरी करते हैं । कथा के मध्य में गऊ माता की महत्ता बतायें पहले भोजन गऊ को खिलाये भोजन करें और बचे हुए भोजन कुत्तों को देने से घर का वास्तु दोष दूर हो जाते हैं। घर में सब बैठ कर भजन करें । बाल गोपाल जैसे चोरी करने को टीम बनाकर चोरी करतें हैं तो गोपियों ने भी टीम बनाकर हंडियो में घन्टी बांध देते हैं और जैसे ही भगवान माखन चुरा कर खाते हैं तो घंटी बज जाती है और भगवान पकड़े जाते हैं माता यशोदा के पास ले जाते है यशोदा माता देखतीं हैं तो कृष्ण तो घर में सोये हैं सब चकित हो जाते हैं । कृष्ण की बाल लीला पूतना उद्धार गर्गाचार्य जी के द्वारा भगवान का नामकरण मृद भक्षण लीला के माध्यम से भगवान ने पृथ्वी का नाम क्षमा होने से क्षमांश एवं रसा होने से रस का स्वाद लिया और भू पराग भी लिया है माखन चोरी लीला मे भगवान का उद्देश्य गोकुल का माखन मथुरा न जाने का था क्योंकि कंस की थी गोकुल का सारा माखन मेरे यहां भेजिए और दामोदर लीला मे भगवान को जब मैया यसोदा रस्सी से बांधने लगी तब बार बार रस्सी दो अंगुल की दूरी बना रही थी क्योंकि कि मैया ने कन्हैया को बांधने के जो साधन अपनायी थी वो भी दो अक्षर के थे जैसे दो हाथ रस्सी भी दो अक्षर की हृदय मे दो अक्षर का क्रोध lबाद मे भगवान उन्हीं रस्सियों से बंधे क्योंकि गोलोक धाम से आयीं रस्सियाँ भी अपना कल्याण चाहती थी जब सारी रस्सियों को मैया ने जोड़ दिया तो कन्हैया मां के स्नेह मे बंध गये l सभी श्रोता शांति पूर्वक कथा श्रवण कर रहे हैं । आज कथा सुनने आऔर कथा विश्राम पर हजारों भक्तों ने पूरे मन से कथा श्रवण किये छप्पन भोग की प्रसाद ग्रहण किये ।








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