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गो-शालाओं के लिए आवंटित धनराशि मे बंदरबांट को लेकर विरोध की आवाज दबाना तानाशाही- प्रमोद तिवारी Dainik mail 24


सीडब्लूसी मेंबर ने अटल जयंती पर पीएम को बाजपेई द्वारा दिये गये राष्ट्र राजधर्म याद दिलाते हुए काले कृषि कानून वापस लिये जाने की दी नसीहत



लालगंज, प्रतापगढ़। कांग्रेस वर्किग कमेटी के सदस्य एवं आउटरीच एण्ड कोआर्डिनेशन कमेटी के प्रदेश प्रभारी प्रमोद तिवारी ने भाजपा शासित राज्यों उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश मे सरकारो द्वारा गोशालाओं के लिए आवंटित धनराशि मे हो रही बंदरबांट पर कडी चिंता जताई है। श्री तिवारी ने कहा है कि गोवंश की देखरेख मे पूरी तरह विफल राज्य सरकार उल्टे भूख और प्यास तथा ठण्ड से तड़पकर दम तोड़ रहे गोवंशो की सुरक्षा की आवाज को दबाने के लिए बलपूर्वक अलोकतांत्रिक कदम उठाने पर अमादा हो गयी है। शुक्रवार को यहां मीडिया को जारी बयान मे प्रमोद तिवारी ने कहा कि प्रतापगढ़, ललितपुर, झांसी, चित्रकूट आदि जिलों मे गौशालाओ मे बड़ी संख्या मे गोवंश की निर्मम हत्याएं हुई है। बकौल प्रमोद तिवारी गोवंश की इन हत्याओं की एक मात्र वजह सरकारी आवंटित धनराशि को सत्ता के दलालो द्वारा लूटा जाना है। उन्होने कहा कि कांग्रेस गाय बचाओ-किसान बचाओं पद यात्रा के जरिये ललितपुर के सौजना गोशाला से चित्रकूट तक पदयात्रा निकाल रही है। सीडब्लूसी मेंबर प्रमोद तिवारी ने कहा कि पद यात्रा निकालने से पूर्व ही झांसी मे पार्टी के राष्ट्रीय सचिव रोहित चौधरी को गिरफ्तार कर लिया गया तथा पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य को नजरबंद कर दिया गया। उन्होने सरकार के कांग्रेसी नेताओं की गिरफ्तारी तथा नजरबंद की कार्रवाई को अलोकतांत्रिक ठहराते हुए इसे निदंनीय भी करार दिया। उन्होने सरकार से अहिंसात्मक एवं शांतिपूर्वक ढंग से कांग्रेस की गाय बचाओ किसान बचाओ पद यात्रा को जारी रखने की भी मांग करते हुए कहा कि सरकार तानाशाही से बाज आये और गौशालाओं मे आवंटित धनराशि की लूट के गोरखधंधे से मुंह चुराने के लिए लोकतंत्र का गला न घोटें। वहीं सीडब्लूसी मेंबर प्रमोद तिवारी ने अटल जयंती पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बहुप्रचारित किसानो को दिये गये संदेश को जुमलों व झूठ से लवरेज ठहराते हुए कहा कि असलियत समझकर किसानो ने पीएम के गुमराहवादी संदेश को नकार दिया है। प्रमोद तिवारी ने दावा किया कि इसका उदाहरण भाजपा द्वारा सरकारी उपक्रमों से आयोजित चौपालो मे किसानो की नगण्य भूमिका की जगह भाजपा कार्यकर्ताओं और रोजगार सेवको तथा अन्य सरकारी कर्मचारियों के द्वारा औपचारिकता पूरी करने मे साफ दिखी है। उन्होने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानून का हिस्सा नहीं बनने देने पर अडिग मोदी सरकार फसल की उपज को पूंजीपतियो के हवाले करने पर अमादा है। मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल के हवाले से जारी यहां बयान के तहत श्री तिवारी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई को सर्वप्रिय नेता ठहराते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मोदी सरकार पर तंज कसा कि वह गुजरात मे कत्ल ए आम के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई की नरेन्द्र मोदी को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप मे राष्ट्र राजधर्म निभाने का जो संदेश दिया था पीएम अब तो उस पर अमल करें। श्री तिवारी ने कहा कि पिछले तीस दिनों से किसान दिल्ली की सड़को को कडाके की ठण्ड मे बैठे है और आंदोलन मे इक्तीस से अधिक निर्दोष किसान अपनी जान गवां बैठे। ऐसे मे प्रमोद तिवारी ने प्रधानमंत्री से कहा कि अटल बिहारी बाजपेई को सच्ची श्रद्धांजलि तो यही होगी कि वह राष्ट्र राजधर्म को निभाते हुए किसानो की मांग को स्वीकार कर तीनों काले कृषि कानून वापस लेने का ऐलान करें।








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