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कोई खाता न कोई बही है. पत्नी जो भी कहे वो सही है Dainik mail 24

 

यूपी महोत्सव में कवियों ने जमाया साहित्य के रंग



यू पी महोत्सव 2020 , अलीगंज, लखनऊ में देश  के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल विहारी बाजपेयी की  जायंत्री  के अवसर पर सामाजिक  सांस्कृतिक संस्था सुकन्या सेवा संस्थान के आयोजन तथा हास्यकवि आशुतोष आशु के संयोजन में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया.जिसमें विभिन्न विधाओं के 15 साहित्यकारों को "अवध गौरव सम्मान" से  सम्मानित किया गया. वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दिनेश चन्द्र अवस्थी की अध्यक्षता व मुख्य अतिथि प्रसिद्ध गीतकार डॉ.अजय प्रसून की उपस्थिति तथा हास्यकवि संदीप अनुरागी के संचालन में बहुतशानदार कवि सम्मलेन रहा.सर्वप्रथम सामाजिक सरोकार की ख्यातिलब्ध कवयित्री निशा सिंह नवल  की  वाणी वंदना के उपरांत गीतकार सौरभ तिवारी के गीत -"देहरी पर बैठकर संग, दीपक जलाना चाहते हैं." से कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ. इसके उपरांत उन्नाव के ओजकवि शानू बाजपेई अपूर्व ने कविता -"बुरी नजरों से हरदम बचाती है माँ.भूखी रहकर भी मुझको खिलाती है माँ." पढ़कर माँ की महिमा का  बखान किया.इसके बाद भोजपुरी के ख्यातिलब्ध गीतकार डॉ सुभाष चंद्र रसिया ने गीत -"रोज डीपी बदलने की आदत उन्हें.वो सलामत रहें रब इबादत उन्हें." पढ़कर वाहवाही बटोरी. श्रृंगार की सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. श्वेता श्रीवास्तव ने-"तुम्हारे याद के लम्हें सजा रखें हैं आँखों में. तुम्हारे नाम के आंसू छुपा रखें हैं आँखों में." गुनगुना कर कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान किया. इसके बाद हास्य के  ख्यातिलब्ध कवि विपिन मलिहाबादी ने  हास्य कविता -"कोई खाता न कोई बही है. पत्नी जो भी कहे वो सही है ."पढ़कर सबको  खूब  हंसाया. इसके बाद  सामजिक सरोकार की ख्यातिलब्ध कवयित्री निशा सिंह नवल ने निराशा में आशा का  संचार करने वाला गीत -"पीर पराई से दृग नम हो, कोमल मन  हो  तेरा. अंधियारों से  मत घबराना, होगा  नवल  सबेरा." सुनाकर सबको  मन्त्रमुग्ध किया.इसके उपरांत अमेठी के  गीतकार सूर्य प्रकाश सूरज ने खूबसूरत नज्म -"वक्त की शाख भी ये  लचकेगी. गीत सावन के  गुनगुनाओगे." सुनाकर सबको  भावविभोर किया.तत्पश्चात वरिष्ठ कवयित्री स्वधा रविंद्र उत्कर्षिता ने वर्तमान दशा पर व्यंग्य -"मछलियों के पर निकल आये वो  उड़ने लगी. छोड़कर अपना जलाशय नभ  पे चढ़ने लगी." पढ़कर सबको वर्तमान परिवेश से अवगत कराया.कार्यक्रम का सुन्दर संयोजन कर रहे प्रतापगढ़ के हास्यकवि आशुतोष आशु ने छंद -"जीवन के पथ पर आयी कठिनाइयों से, मानते कभी  भी  नहीं हार थे अटल जी,भारती की अस्मिता पे आती यदि आंच तो,अरियों पे करते प्रहार थे अटल जी."पढ़कर पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न को अटल बिहारी बाजपेयी को नमन किया. इसके बाद दिल्ली से आयी ख्यातिलब्ध कवयित्री अनुजा बाजपेई मनु ने श्रृंगारिक गीत -"बस जमाने के दस्तूर तक तो नहीं, बस कदम दो कदम तक तो  नहीं, कितने जन्मों  के अनुबंध होते हैं कुछ, सारे सम्बन्ध सिंदूर तक तो नहीं. "पढ़कर सबको मन्त्र मुग्ध किया. इसके बाद लखीमपुर के गीतकार सुकान्त मिश्र ने- "भाग्य के लेखे उदय होते रहे, हम सहज ही पाके सब खोते रहे." गीत तथा प्रयाग के कार्तिकेय मिश्र की ग़ज़ल के  बाद गीतकार डॉ अजय प्रसून ने गीतिका  -"जब हमारी सोच हल्की से  भी हल्की हो, तब कलम से  रोशनाई  रूठ जाती है. " पढ़कर कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान किया.डॉ दिनेश चंद्र अवस्थी ने -"बड़े बड़े  नेता सभी,  होते जैसे पेड़.जुडी रहें अंदर जड़े,ऊपर से मुठभेड़." पढ़कर अध्यक्षीय काव्यपाठ किया.अंत में   संस्था सचिव सिद्धार्थ पाण्डेय ने कवियों को समाज का दर्पण बताया तथा संस्था अध्यक्ष नेहा उपाध्याय ने सबका आभार व्यक्त किया.








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