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नाना के आदर्शों पर चलते हुए जनहित मे सदैव रहूंगा तत्पर - युवराज Dainik Mail 24

 

प्रतापगढ़ ,कालाकांकर,धारुपुर, ऐन्ठु और लालगंज में पूर्व विदेश मंत्री राजा दिनेश सिंह की पुण्यतिथि पर लोगों ने श्रद्धा सुमन अर्पित कर किया था याद



प्रतापगढ़‌। 30 नवम्बर 1995 को प्रतापगढ़ ही नहीं वरन भारत की भूमि को अपने कृत्यों से सुसज्जित कर दुनिया में अलग पहचान दिलाने वाले  और 50 वर्ष मातृभूमि की सेवा में समर्पित करने वाले राजा दिनेश सिंह जी की पुण्यआत्मा ने परमात्मा के श्री चरणों  प्रस्थान किया था। राजा दिनेश सिंह ने भारत की राजनीति के साथ ही जनता के दिलों में एक अलग स्थान बनाये थे जो उनके जाने के बाद रिक्त सा हो गया है।जिसे भर पाना आज तक सम्भव नहीं हो पाया हैं। उनके जैसा राजनैतिक कुशल व्यक्तित्व दूसरा दिखाई नहीं पड़ा। 19 जुलाई 1925 को कालाकांकर के राजा अवधेश सिंह के इकलौते पुत्र के रूप में इन दिव्य विभूति का जन्म हुआ।बचपन से ये बहुत होनहार रहे। भारत सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालयों की शोभा बढ़ाते हुए जनता के दिलों पर लगातार छाये रहे। प्रतापगढ़ को एटीएल फैक्ट्री की सौगात दी। कई शिक्षण संस्थाए दी।उक्त विशेषताओं को याद करते हुए लोगों ने उन्हें आज अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

          कालाकांकर के युवराज भुवन्यू सिंह जो कि उनके नाती हैं अपनी मां राजकुमारी रत्ना सिंह के साथ प्रतापगढ़ में अपने कार्यालय पहुंचे और अपने नाना राजा दिनेश सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनको अपना आदर्श बताया ।उन्होंने  कहा मेरे आदर्श नाना जी राजा दिनेश सिंह जी (पूर्व विदेश मंत्री) आपकी पुण्यतिथि पर आपको सादर नमन् करता हूं। मैं आपके द्वारा स्थापित आदर्शो और पदचिन्हों पर चलकर आपके नाम को और बुलंद कर सकूं इसी उद्देश्य के साथ जनसेवा में लगा हूँ। आपकी यादें हमें आंतरिक शक्ति देकर और अच्छा कार्य करने की प्रेरणा देती हैं। ईश्वर को कोटिशः आभार कि आपकी गोद में खेलकर बचपन का इतना प्यार ,दुलार और आशीर्वाद आपके नाती को सौभाग्य में मिला। राजकुमारी रत्ना सिंह ने अपने पिता जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा मैंने पिताजी के छूटे सपनो को साकार करने के प्रयास किये। जनपद के लोगों ने पिताजी के बाद मुझे भी भरपूर प्यार दिया।मेरे बेटे भुवन्यू सिंह भी उनके वसूलों पर चलते हुए जनसेवा कर रहे हैं।








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