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किसानों से राजहठ छोड राजधर्म का निर्वहन करते खुद वार्ता शुरू करें प्रधानमंत्री- प्रमोद तिवारी Dainik mail 24



सीडब्लूसी मेंबर ने प्रधानमंत्री के सर्वदलीय बैठक मे किसान आंदोलन के मंतव्य पर उठाये सवाल, लाल किले की घटना पर किया घेराबंदी, रसोई गैस व डीजल पेट्रोल मे मंहगाई को बताया खुली सरकारी लूट





प्रतापगढ़। केन्द्रीय कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य एवं यूपी आउटरीच एण्ड कोआर्डिनेशन कमेटी के प्रभारी प्रमोद तिवारी ने प्रधानमंत्री से किसान आंदोलन के समाधान के लिए स्वयं बेहिचक किसानो से वार्ता की पहल पर जोर दिया है। श्री तिवारी ने पीएम मोदी के सर्वदलीय बैठक का हवाला देते हुए कहा कि यदि पीएम कह रहे है कि वे किसानो से महज एक फोन कॉल के दूरी पर है तो फिर दिल्ली मे ही लगातार आंदोलन कर रहे किसानो से स्वयं वार्ता के लिए आखिर वह क्ंयू संकोच कर रहे है।


 रविवार को नगर के दौरे पर आये प्रमोद तिवारी ने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि सर्वदलीय बैठक मे प्रधानमंत्री ने यह कहकर कि किसानो के लिए कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर का प्रस्ताव अभी भी हूबहू वही है और वार्ता ही आंदोलन का हल है। ऐसे मे प्रमोद तिवारी ने प्रधानमंत्री से कहा कि जब वह अप्रत्यक्ष रूप से यह स्वीकार कर रहे है कि किसान न तो केन्द्रीय कृषि मंत्री के प्रस्ताव पर कोई रजामंदी दे रहे है और न ही उन्हें मंत्री के प्रस्ताव पर रंच मात्र भी विश्वास है। तो ऐेसे मे बकौल प्रमोद तिवारी पीएम होने के नाते मोदी को बेहिचक किसानो से खुद सीधी वार्ता करनी चाहिए। सीडब्लूसी मेंबर प्रमोद तिवारी ने कहा कि देश का किसान दिल्ली मे पिछले लगभग सत्तर दिनों से भूखा प्यासा आंदोलनरत है, ऐसे मे यदि पीएम का अहंकार उन्हें वार्ता के लिए रोक रहा है और वह चिंताजनक स्थिति मे भी दिल्ली के सीमा पर बैठे किसानो को बुलाकर वार्ता नही कर सकते तो यह स्पष्ट है कि पीएम हठधर्मिता और जिद तथा अहंकार और पूंजीपतियों के हित मे राजहठ को छोड राजधर्म का निर्वहन नही कर रहे है। कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य प्रमोद तिवारी ने कहा कि अब तक की सरकार के स्तर पर वार्ता से स्पष्ट हो चुका है कि कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर सरकार का नही बल्कि पूंजीपतियों का प्रतिनिधित्व कर रहे है। श्री तिवारी ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने तीनों काले कृषि कानून को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया है और केंद्र सरकार भी इसे डेढ साल के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव दे चुकी है तो केंद्र क्यों नही इन कानूनों को डेढ साल के लिए निरस्त कर देती। श्री तिवारी ने सरकार को सलाह देते हुए कहा कि वह वार्ता सुनिश्चित करे और यदि वार्ता सफल नही होती तो डेढ साल बाद पुनः प्रस्ताव लाकर इसे कानून बनाते? उन्होनें कहा कि लोकतंत्र की गरिमा के लिए और देश की एक सौ तीस करोड की जनता के हित की सुरक्षा के लिए किसान आंदोलन का समाधान सरकार संवेदनशीलता से करने की पहल करे। श्री तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री को स्वयं इस संवेदनशील राष्ट्रीय मसले पर संपूर्ण विपक्ष को विश्वास मे लेना चाहिए। सीडब्लूसी मेंबर प्रमोद तिवारी ने आश्चर्य जताया कि प्रधानमंत्री भी स्वयं स्वीकार कर रहे है कि किसान आंदोलन का हल मात्र वार्ता के द्वारा ही संभव है और कांग्रेस समेत संपूर्ण विपक्ष भी यही कह रहा है कि वार्ता के जरिए ही इस समस्या का हल किया जा सकता है। बकौल प्रमोद तिवारी ऐसे मे फिर प्रधानमंत्री को देश के सबसे बडे राष्ट्रीय आंदोलन जिसके तहत पूरा देश किसानो की मांग को सही ठहरा रहा है तो प्रधानमंत्री आखिर क्ंयू चुप है। उन्होने पीएम से कहा कि वह जिद छोडें और कांग्रेस सहित प्रमुख विपक्षी दलों को विश्वास मे लेकर किसानों से सीधी बातचीत शुरू करे। उन्होने सर्वदलीय बैठक मे पीएम के द्वारा विपक्षी दलो से भी किसानो से बातचीत करने की अपील पर तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने इन तीनों काले कृषि कानूनों को पारित करने से पहले विपक्षी दलों से विचारविमर्श क्यों नही किया। श्री तिवारी ने पीएम को उनका राजधर्म याद दिलाया कि वह सरकार का नेतृत्व कर रहे है और स्वयं किसानो से वार्ता न कर विपक्ष से अपील कर रहे है। इधर दिल्ली मे गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर उत्पन्न स्थिति का जिक्र करते हुए प्रमोद तिवारी ने कहा कि इस संपूर्ण घटनाचक्र मे अब दिल्ली पुलिस प्रशासन की जो दुरभि संधि देश के सामने आयी है उससे दिल्ली पुलिस का चेहरा देश को शर्मसार करने वाला उजागर हो गया है। उन्होनें कहा कि पुलिस की उपस्थिति मे मुटठी भर लोगों ने लाल किले पर धार्मिक झण्डा फहरा दिया और अब तो यह झण्डा फहराने वाले दीप सिद्धू का इकबालिया बयान भी सामने है कि वह संसद के चुनाव मे भाजपा का प्रचारक रहा है तो यह बात आईने की तरह साफ हो गयी है कि दो माह से चलने वाले अहिंसात्मक व निश्कलंक किसान आंदोलन को बदनाम करने व उसे तोडने का कुचक्र प्रशासन ने ही रचा था। उन्होनें कहा कि किसानों पर भाजपा सरकार जिस तरह बर्बरता कर रही है उससे भी यह तस्वीर साफ हो गयी है कि तमाम कुचक्र ब्रिटिश हुकूमत के भी कुचक्रों को पीछे छोड गया है। उन्होनें कांग्रेस की ओर से स्पष्ट ऐलान किया कि वह शांतिपूर्वक तथा अहिंसात्मक किसान आंदोलन को पूर्ण समर्थन जारी रखेगी। इधर एक सवाल के जबाब मे सीडब्लूसी मेंबर प्रमोद तिवारी ने रसोई गैस की कीमत मे पचास रूपये प्रति सिलेण्डर सरकार बढोत्तरी को गृहणियों के रसोई को बिगाडने वाला एक और विश्वासघाती कदम ठहराया है। उन्होनें कहा कि दुनिया के बाजार मे कच्चे तेल की कीमत कम होने के बावजूद डीजल तथा पेट्रोल के दामो मे बढोत्तरी से भी साफ हो गया है कि भाजपा सरकार किसानों व सामान्य उपभोक्ताओं की जेब पर खुला डांका डलवा रही है। उन्होनें कहा कि डीजल का प्रयोग कृषि बाहुल्य क्षेत्र मे होने से इसके दामो मे बढोत्तरी आम जनता पर सरकारी सहयोग से खुली लूट है। इसके पश्चात प्रमोद तिवारी ने छींटपुर डाल्फिन पब्लिक स्कूल मे अशोक त्रिपाठी के संयोजन मे आयोजित रामप्रकाश त्रिपाठी स्मृति कार्यक्रम मे शामिल हुये। इस मौके पर पं. श्यामकिशोर शुक्ल, डा. नीरज तिवारी, कपिल द्विवेदी, ज्ञानप्रकाश शुक्ल, महेन्द्र शुक्ल, डा. प्रशांतदेव शुक्ल, डा. लालजी त्रिपाठी, नरसिंह प्रकाश मिश्र, ज्योतिकुमार तिवारी गल्ली, प्रवीण द्विवेदी, दानिश माबूद आदि रहे।

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