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धर्म की रक्षा के लिए धरती पर होता है भगवान् का अवतार-आचार्य बालशुक सर्वेशमणि Dainik mail 24

 

पूरे चोपसिंह में भागवत कथा श्रवण के लिए श्रद्धालुओं का तांता




लालगंज, प्रतापगढ़। रामपुर बावली के समीप पूरे चोपसिंह गांव में हो रही भागवत कथा में शुक्रवार को श्रद्धालुओं का तांता लगा दिखा। कथाव्यास पं. बालशुक सर्वेशमणि शांडिल्य जी ने कहा कि धरती पर जब जब भी अधर्म बढ़ता है इसके विनाश के लिए और धर्म की स्थापना के लिए प्रभु को अवतार लेना ही पड़ता है। उन्होनें कहा कि भगवान ने अधर्म के विनाश के लिए स्वजनों को भी दण्डित करने का मार्ग प्रशस्त किया है। आचार्य सर्वेशमणि जी ने कहा कि कलियुग के इस काल में भगवान की आराधना ही मनुष्य को समस्त दुःखों से पार लगा सकती है। कथाव्यास ने कहा कि धर्म का अर्थ है जीवन को सुचिता और नैतिकता के साथ समर्पित किया जाना। मनुष्य का जीवन तभी सफल व सुफल होता है जब वह चरित्र एवं संस्कार से बलवान हुआ करता है। जीवन में तपोबल ही सर्वश्रेष्ठ बल कहा जाता है। प्राणियों के प्रति सदभाव तथा परेशान लोगों की सहायता एवं अहंकार तथा अत्याचार का विनाश ही धर्म का मूल है। कथाव्यास ने लोगों को बताया कि पूजा और आराधना तभी फलवती हुआ करती है, जब हम सच्चे मन से भगवान् के सुझाये व बताये गये नीतियों का अनुसरण किया करते है। कथाव्यास ने भजन व संकीर्तन को भी साधना का मंत्र ठहराया है। कथा के दौरान माधव बिहारी का संकीर्तन भी मनोरम दिखा। कथा के संयोजक राजपति सिंह तथा राज बहादुर सिंह राजू ने आचार्य पीठ का श्रीअभिषेक किया। सह संयोजिका रेनू सिंह ने प्रसाद वितरण का प्रबन्धन किया। कथाश्रवण में डा. चन्द्रेश सिंह, दानपाल द्विवेदी, पं. रमाशंकर शुक्ल, माता शुक्ला, हरिकेश बहादुर सिंह, भुवनेश्वर शुक्ल, अवधेश नारायण पाण्डेय, ददन मिश्र, रोहित सिंह, दयाशंकर पाण्डेय, रामजस पाण्डेय, ओमप्रकाश मौर्य, दिनेश पाण्डेय, राजेश गुप्ता, बृजभूषण सिंह, अजय प्रताप सिंह, कमल सिंह आदि रहे।








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