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संसार की चिंता त्यागो चिंतन मेरे गोविंद का करो - आचार्य देवव्रत Dainik mail 24

 


प्रतापगढ़ । महियामऊ में श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह का श्रवण कराते हुए वाल शुक कथा व्यास आचार्य देवव्रत महराज ने कहा मनुष्य अपने कर्मों का फल भोगता है। जीव सुख में भगवान को विस्मॄत कर देता है ।यदि सुख में परमात्मा की याद ज्यादा करेंगे तो दुख आएगा ही नहीं, परमात्मा को कभी भूलो नहीं भगवान हमेशा मेरे साथ हैं, यह मन में विश्वास होना चाहिए ।भगवान नारायण के वैसे तो 24 बंदनीय अवतार हैं लेकिन उसमें दो मुख्य हैं। प्रथम मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राघवेंद्र सरकार का दूसरा भगवान श्री कृष्ण हमारे कन्हैया का।

          संसार में तीन राम हुए। एक जिन्होंने तपस्या करके हाथ में फरसा लेकर लोगों को राम भक्तों के मार्ग को प्रशस्त करते हुए सही रास्ता दिखाया। वह भार्गव राम परशुराम कहलाए। दूसरे राम कर्मयोगी मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम और तीसरे ज्ञानयोगी बलरामजी हुए। 7 दिन के कन्हैया को पूतना मारने आई अविद्या को पूतना  कहते हैं ।अविद्या का निवास पांच ज्ञानेंद्रियां पांच कर्म इंद्रियां मन बुद्धि चित्त और संस्कार इन 14 स्थानों पर वास होता है। गावो विश्वस्य मातर: गाय विश्व की माता है। आप गौ सेवा करते हैं तो 33 कोटि देवताओं की सेवा का फल मिलता है। 5 वर्ष के कन्हैया गोपालक बनकर के गाय चराने गए इसलिए उनका नाम गोपाल पड़ा सकटासुर अघासुर सहित अनेक राक्षसों का उद्धार कर 7 वर्ष के कन्हैया ने  7 दिन 7 रात बायीं अंगुली पर गिरिराज को धारण कर इद्र के घमंड को चूर किया ।इंद्र भगवान की शरण में आया और सुरभि नाम की गाय के दूध से ऐरावत के सूंड में  भरकर भगवान का अभिषेक किया और गोविंद नाम से पूजा करके शरणागत हुआ। चिंतन मेरे गोविंद का करो चिंता संसार की त्यागो चिंता को त्याग कर चिंतन को बढ़ाओगे तो गोविंद अवश्य मिलेगा। भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने जो किया है उसे हमें करना चाहिए और जो भगवान श्री कृष्ण ने कहा है उसे हमें आत्मसात करना चाहिए। अवसर पर धर्म आचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास द्वारा कथा व्यास को अंगवस्त्रम एवं माल्यार्पण करके सम्मानित किया गया संतोष दुबे पूर्व सभासद दिनेश शर्मा प्रतिनिधि मंत्री डॉक्टर महेंद्र सिंह राजू दुबे मोनू पांडे उमेश द्विवेदी राधे मोहन त्रिपाठी आचार्य  अभिनव आचार्य विवेकानंद पांडे  सहित हजारों की संख्या में लोगों ने कथा श्रवण किया।








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