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कोरोनावायरस की पूरी जानकारी एक लेख में Dainik mail 24


 दो मौसमों के बीच  उतार चढ़ाव से वाइरल इंफेक्शन का दौर चलता है।यह प्रकृति का पुराना नियम है।जो चलता आ रहा है और चलता रहेगा।उससे बचने के लिए मानव संघर्ष करता था अब भी करता है।जो संघर्ष को झेल ले जाता है वह रह जाता है। पृथ्वी पर मानव जीवन ही सर्व श्रेष्ठ जीवन है।जिसका आनंद हर कोई लेना चाहता है।
 संतुलन बनाये रखने के लिए  प्रकृति अपना उपाय करती है और जीवन  प्रभावित होता है।  विकास के दौर में तरह तरह की खोजें हुईं हैं और जारी है।जिसकी व्यवस्था सरकार और सरकारी तंत्र  करता है।किसी भी प्राकृतिक आपदा में
जन धन की हानि से बचने और मानव सुविधाओं को बढ़ाने के लिए सरकार नये नये तरीके से आपदा प्रबंधन करती है।जिसमें सरकार को कड़े फैसले भी लेने पड़ते हैं।प्रकृतिक आपदाएं जैसे आंधी, तूफान,हिमपात,भूकंप आदि। कृत्रिम आपदा जाली नोटों और आतंकवादियों को नियंत्रित करने के लिए नोटबंदी की घोषणा।
बढ़ती आबादी  कई मुशीबतों की जड़ माना जाता है। जिससे पूरी दुनिया प्रभावित है।जिसमें सबसे ज्यादा आबादी चीन की है।इसे नियंत्रित करने के लिए सबसे पहले चाइना को शुरुआत करनी पड़ी।
 

 सर्दी जुकाम, मौसम के उतार चढ़ाव से शुरू होता है तथा वाइरस  से एक दूसरे में फैलता है।जिसके संक्रमण का  जिम्मेदार हमेशा से कोरोना वाइरस रहा है और आज भी है।पहले सर्दी जुकाम होने पर लोग अपने घरों में देशी आयुर्वेदिक काढ़ा से इसका इलाज कर लेते थे।जब मर्ज बढ़ जाता था या बुखार हो जाता था तब अपने पसंदीदा डाक्टर के पास जाते थे।डाक्टर इंजेक्शन और दवा देकर ठीक कर देता था।ज्यादा स्थिति बिगड़ती थी तब नर्सिंगहोमो में या छोटी अस्पतालों से बड़ी सरकारी अस्पतालों में मरीज को रेफर कर दिया जाता था।वहां दवा इंजेक्शन,ग्लूकोज और ऑक्सीजन या बाहर मेडिकल स्टोरों से काबिल दवाएं मंगाकर विभिन्न व्यवस्थाओं  द्वारा वही डाक्टर इसी कोरोना से प्रभावित मरीज को स्वस्थ कर देता था। उस समय कोई प्राइवेट डाक्टर या सरकारी डॉक्टर नहीं कहता था कि पहले कोरोना टेस्ट करालो। जब निगेटिव होगे तब हम इलाज करेंगें या भर्ती करेंगें।सारा कार्य ठीक ठाक चल रहा था। हां इतना था कि अस्पतालों में,शहरों में, रेलों में, बसों में भीड़ बढ़ती थी।जनता अपनी कमाई और वेतन का रूपया खर्च करके अपना बचाव कर लेती थी।लेकिन इन सब प्रक्रियाओं में  सरकार का भी बजट तेजी से बढ़ता जा रहा था। अस्पतालों में भीड़ बढ़ जाती थी।सरकार का काफी बजट सरकारी अस्पतालों में दवाई और उपकरण में खर्च हो जाता रहा।जिसका अधिकांश लाभ जनता और जनता के बीच से सरकारी तंत्र में पहुंचे लोग पाते थे।सरकारी खजाने में कुछ भी लौटकर नहीं जाता था और सरकार की अर्थ व्यवस्था चरमरा जाती रही।
 पहले सभी डाक्टर सामान्य रूप से सर्दी,ज़ुकाम बुखार का इलाज करके ऐसे मरीजों को राहत पहुंचाते थे।सरकार के आदेशानुसार आज किसी भी मर्ज के  इलाज के पहले कोरोना जांच रिपोर्ट मांगी जाती है।क्योंकि प्राइवेट डाक्टर या सरकारी डाक्टर को कोरोना निगेटिव का ही इलाज करने का आदेश है।जिसकी जांच की व्यवस्था केवल सरकार के अधीन है।सरकार के निर्देशों के अनुसार सरकारी पैथालाजिस्ट जांच करता है और  रिपोर्ट देता है।इन सारी प्रक्रियाओं में साधारण मरीज भी गंभीर स्थिति में आ जाता है।कोरोना पॉजिटिव का इलाज केवल सरकार द्वारा निर्धारित कोविड अस्पतालों में  कराने की बाध्यता   है।ऐसा इसलिए है क्योंकि पॉजिटिव आने पर एम्बुलेंश से आपको सीधे कोविड अस्पताल में पहुंचा दिया जाता है।आप अन्यत्र जा भी नहीं सकते।वहां क्या व्यवस्था है और क्या इलाज है इसको सभी सोसल मीडिया के जरिये देख और सुन रहे हैं।यदि आप गंभीर अवस्था में किसी मरीज को किसी प्राइवेट अस्पताल में ले जाते हैं तो वह भी कोरोन की जांच कराने का फरमान सुना देते हैं।सरकारी में जाते हैं तो वहां बेड नहीं खाली हैं।  
कोरोना वाइरस को लेकर इतना हाहाकार और दहसत इसीलिए है।क्योंकि कहीं इलाज नहीं मिल रहा है।इसी लिए हर  व्यक्ति घबराया हुआ है।अधिक मौतों का यही एक मात्र कारण  है।आत्म बल गिरा दिया गया है।इसे सभी को समझना चाहिए।साधारण मर्ज का रोगी भी गभीर अवस्था में चला जा रहा है। वर्तमान में सभी चीजों के विकास के साथ साथ कोरोना को भी पौष्टिक पदार्थ ज्यादा मिलने लगे हैं। इस लिए इसकी भी ताकत बढ़ गई है। जिसे भी मलाई काटने को मिल जाये वही शक्तिशाली हो जाता है।परन्तु जब वह जान लेवा साबित होने लगता है या सरकार और सरकारी को प्रभावित करने लगता है तब उसका इलाज  करने के लिए सरकार अपने हथकंडे अपनाना शुरू कर देती है।आज  यही स्थिति है।कोरोना की चपेट में आने वाले लोग पहले देशी इलाज के साथ साथ साफ सफाई और आयुर्वेदिक तथा देशी दवाओं का काढ़ा पीते थे।अब भी कोविड नियमों का पालन करें।सर्दी जुकाम बुखार होने पर शुरू से ही सावधानी बरतें।हाथ को सिनेटाइज करें,हाथ धोएं,मास्क का प्रयोग करें,दूरी बनाए रखें,घबराएं नहीं,आत्मबल बनाये रखें।जो भी मौतें हो रही हैं उससे सीख लें।बचाव करें।आपकी लापरवाही देश की अर्थव्यवस्था और मानव सुविधाएं  प्रभावित करती हैं।जिसकी रक्षा के लिए सरकार मजबूरी में कड़े फैसले लेती है।जो हिम्मत केवल वर्तमान शासन व्यवस्था में है।हम अपने को कैसे सुरक्षित और फिट बना सकते है वह स्वयं को सोचना, समझना और करना है।
































































































































एस. एन. गुप्त रिपोर्टर। (Copy Paste)

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